बंदी मोनू पहाड़ी के मौत की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू

इटावा। जेल के अंदर हमले में बंदी मोनू पहाड़ी के मौत की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू हो गई है। डीएम जेबी सिंह के स्तर से नामित जांच अधिकारी/एडीएम ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि एक अप्रैल को जेल के अंदर हुई घटना के संबंध में यदि कोई व्यक्ति अपना बयान अथवा साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहता है तो वह 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे तक अपर जिलाधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर दे सकता है।


 

उन्होंने बताया कि जिला कारागार के अधीक्षक ने घटना के संबंध में पत्र भेजकर जानकारी दी है कि एक अप्रैल की शाम करीब 7 बजे उप कारापाल जगदीश प्रसाद बैरक संख्या 6-8 के अहाते में कारागार बंद करा रहे थे। उनके साथ में प्रभारी हेड जेल बार्डर पुरुषोत्तम सिंह, प्रभारी जेल बार्डर अंकित पाठक के अलावा नंबरदार बंदी सत्यवीर, छुन्नालाल व रामखिलावन आदि बंदियों की तलाशी व गणना कर रहे थे।
तभी कैदी मुन्ना खालिद पुत्र अब्दुल रहीम, बंदी मोनू पहाड़ी उर्फ राशिद पुत्र नासिर अली ने साथी बंदियों ताजुद्दीन पुत्र बसरुद्दीन, रामकुमार पुत्र छोटेलाल, अंकित फौजी पुत्र रामचंद्र, दिलीप दुर्वेश पुत्र रामशंकर, डबलू अनरुद्ध पुत्र अशोक, शिवामणि पुत्र शिवशंकर, संजय उपाध्याय पुत्र वीरप्रताप और अन्य 15-20 बंदियों के साथ मिलकर उप कारापाल जगदीश व उनके साथ मौजूद स्टाफ व नंबरदार बंदियों पर जानलेवा हमला कर दिया था। शोर शराबा सुनकर जब एक अन्य उप कारापाल सिब्तेहसन जाफरी, दिन के समय के हेड जेल बार्डर मन्नू सिंह, बंदी सुधीर, महेंद्र, प्रदीप, प्रबल, मनीष, आमिर वहां पहुंचे तो उनके ऊपर भी हमला किया इसमें इन सभी के चोटें आईं।
घायलों को तत्काल जेल के अस्पताल पहुंचाया गया था। नंबरदार छुन्नालाल के सिर में आई गंभीर चोट के कारण जिला अस्पताल भेजा गया था। घटना को लेकर अलार्म बजाया और पुलिस प्रशासन, पीएसी, कारागार स्टाफ समेत नंबरदार बंदियों ने हमलावर बंदियों को बल प्रयोग करके नियंत्रित किया था। इस घटना में घायल बंदी मोनू पहाड़ी को जेल चिकित्सक के परामर्श पर रात करीब 11:20 बजे जिला अस्पताल भेजा गया। जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया था।